Article 348 of the Constitution | अनुच्छेद 348 व्याख्या

यह लेख Article 348 (अनुच्छेद 348) का यथारूप संकलन है। आप इस मूल अनुच्छेद का हिन्दी और इंग्लिश दोनों संस्करण पढ़ सकते हैं। आप इसे अच्छी तरह से समझ सके इसीलिए इसकी व्याख्या भी नीचे दी गई है आप उसे जरूर पढ़ें, और MCQs भी सॉल्व करें।

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📜 अनुच्छेद 348 (Article 348) – Original

भाग 17 [राजभाषा] अध्याय 3 – उच्चतम एवं उच्च न्यायालयों आदि की भाषा
348. उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में और अधिनियमों, विधेयकों आदि के लिए प्रयोग की जाने वाली भाषा— (1) इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी, जब तक संसद्‌ विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे तब तक

(क) उच्चतम न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय में सभी कार्यवाहियां अंग्रेजी भाषा में होंगी,

(ख) (i) संसद्‌ के प्रत्येक सदन या किसी राज्य के विधान-मंडल के सदन या प्रत्येक सदन में पुरःस्थापित किए जाने वाले सभी विधेयकों या प्रस्तावित किए जाने वाले उनके संशोधनों के,

(ii) संसद्‌ या किसी राज्य के विधान-मंडल द्वारा पारित सभी अधिनियमों के और राष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल *1 द्वारा प्रख्यापित सभी अध्यादेशों के, और

(iii) इस संविधान के अधीन अथवा संसद्‌ या किसी राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई किसी विधि के अधीन निकाले गए या बनाए गए सभी आदेशों, नियमों, विनियमों और उपविधियों के,

प्राधिकृत पाठ अंग्रेजी भाषा में होंगे।

(2) खंड (1) के उपखंड (क) में किसी बात के होते हुए भी, किसी राज्य का राज्यपाल 1*** राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उस उच्च न्यायालय की कार्यवाहियों में, जिसका मुख्य स्थान उस राज्य में है, हिन्दी आषा का या उस राज्य के शासकीय प्रयोजनों कै लिए प्रयोग होने वाली किसी अन्य भाषा का प्रयोग प्राधिकृत कर सकेगा :

परन्तु इस खंड की कोई बात ऐसे उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए किसी निर्णय, डिक्री या आदेश को लागू नहीं होगी।

(3) खंड (1) के उपखंड (ख) में किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी राज्य के विधान-मंडल ने, उस विधान-मंडल में पुरःस्थापित विधेयकों में या उसके द्वारा पारित अधिनियमों में अथवा उस राज्य के राज्यपाल 1*** द्वारा प्रख्यापित अध्यादेशों में अथवा उस उपखंड के पैरा (iii) में निर्दिष्ट किसी आदेश, नियम, विनियम या उपविधि में प्रयोग के लिए अंग्रेजी भाषा से भिन्‍न कोई भाषा विहित की है वहां उस राज्य के राजपत्र में उस राज्य के राज्यपाल 1*** के प्राधिकार से प्रकाशित अंग्रेजी भाषा में उसका अनुवाद इस अनुच्छेद के अधीन उसका अंग्रेजी भाषा में प्राधिकृत पाठ समझा जाएगा।
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1. संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 29 और अनुसूची द्वारा (1-11-1956 से) “या राजप्रमुखों शब्दों का लोप किया गया ।

अनुच्छेद 348 हिन्दी संस्करण

Part XVII [OFFICIAL LANGUAGE] CHAPTER III.—LANGUAGE OF THE SUPREME COURT,
HIGH COURTS, ETC.
348. Language to be used in the Supreme Court and in the High Courts and for Acts, Bills, etc— (1) Notwithstanding anything in the foregoing provisions of this Part, until Parliament by law otherwise provides—
(a) all proceedings in the Supreme Court and in every High Court,
(b) the authoritative texts—
(i) of all Bills to be introduced or amendments thereto to be moved in either House of Parliament or in the House or either House of the Legislature of a State,
(ii) of all Acts passed by Parliament or the Legislature of a State and of all Ordinances promulgated by the President or the Governor 1* of a State, and (iii) of all orders, rules, regulations and bye-laws issued under this Constitution or under any law made by Parliament or the Legislature of a State, shall be in the English language.

(2) Notwithstanding anything in sub-clause (a) of clause (1), the Governor 1* of a State may, with the previous consent of the President, authorise the use of the Hindi language, or any other language used for any official purposes of the State, in proceedings in the High Court having its principal seat in that State:

Provided that nothing in this clause shall apply to any judgment, decree or order passed or made by such High Court.

(3) Notwithstanding anything in sub-clause (b) of clause (1), where the Legislature of a State has prescribed any language other than the English language for use in Bills introduced in, or Acts passed by, the Legislature of the State or in Ordinances promulgated by the Governor 1* of the State or in any order, rule, regulation or bye-law referred to in paragraph (iii) of that sub-clause, a translation of the same in the English language published under the authority of the Governor 1* of the State in the Official Gazette of that State shall be deemed to be the authoritative text thereof in the English language under this article.
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1. The words “or Rajpramukh” omitted by the Constitution (Seventh Amendment) Act, 1956, s. 29 and Sch. (w.e.f. 1-11-1956).

Article 348 English Version

🔍 Article 348 Explanation in Hindi

भारतीय संविधान का भाग 17, अनुच्छेद 343 से लेकर अनुच्छेद 351 तक में विस्तारित है जैसा कि आप देख सकते हैं यह पूरा भाग राजभाषा (Official Language) के बारे में है। इस भाग को तीन अध्यायों में बांटा गया है जिसे कि आप नीचे टेबल में देख सकते हैं;\

Chapters Titles Articles
I संघ की भाषा (Language of the Union) 343-344
II प्रादेशिक भाषाएं (Regional Language) 345-347
III उच्चतम एवं उच्च न्यायालयों आदि की भाषा (Language of Supreme and High Courts etc.) 348-349
IV विशेष निदेश (Special Directives) 350-351
Part 17 of the Constitution

इस लेख में हम “उच्चतम एवं उच्च न्यायालयों आदि की भाषा (Language of Supreme and High Courts etc.)” अध्याय के तहत आने वाले, अनुच्छेद 348 को समझने वाले हैं;

Article 120 (Language to be used in Parliament)
Article 210 (Language to be used in the Legislature)
Closely Related to Article 346

| अनुच्छेद 348 – उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में और अधिनियमों, विधेयकों आदि के लिए प्रयोग की जाने वाली भाषा (Language to be used in the Supreme Court and in the High Courts and for Acts, Bills, etc)

जैसा कि हम जानते हैं कि भारत एक भाषायी विविधता वाला देश है। 22 भाषाएँ तो सिर्फ संविधान में वर्णित है इसके अलावा भी विभिन्न भाषा परिवारों की सैंकड़ों भाषाएँ भारत में बोली जाती है।

अनुच्छेद 345 के तहत हमने राज्य की राजभाषा (Official language of the State) को बहुत ही विस्तारपूर्वक समझा है। अनुच्छेद 346 के तहत हमने एक राज्य और दूसरे राज्य के बीच या किसी राज्य और संघ के बीच पत्रादि की राजभाषा के बारे समझा।

अनुच्छेद 348 उसी अनुच्छेद का विस्तार है। यह अनुच्छेद उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में और अधिनियमों, विधेयकों आदि के लिए प्रयोग की जाने वाली भाषा की बात करता है। इस अनुच्छेद के तहत कुल तीन खंड आते हैं;

अनुच्छेद 348 के खंड (1) के तहत कहा गया है कि इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी, जब तक संसद्‌ विधि द्वारा अन्यथा उपबंध नहीं करेगा तब तक निम्नलिखित प्रतिष्ठानों में अंग्रेजी भाषा का प्रयोग होता रहेगा;

(क) उच्चतम न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय में सभी कार्यवाहियां अंग्रेजी भाषा में होंगी।

(ख) (i) संसद्‌ के प्रत्येक सदन या किसी राज्य के विधान-मंडल के सदन या प्रत्येक सदन में पुरःस्थापित किए जाने वाले सभी विधेयकों या प्रस्तावित किए जाने वाले उनके संशोधनों के प्राधिकृत पाठ अंग्रेजी भाषा में होंगे;

(ii) संसद्‌ या किसी राज्य के विधान-मंडल द्वारा पारित सभी अधिनियमों के और राष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल *1 द्वारा प्रख्यापित सभी अध्यादेशों के प्राधिकृत पाठ अंग्रेजी भाषा में होंगे; और,

(iii) इस संविधान के अधीन अथवा संसद्‌ या किसी राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई किसी विधि के अधीन निकाले गए या बनाए गए सभी आदेशों, नियमों, विनियमों और उपविधियों के प्राधिकृत पाठ अंग्रेजी भाषा में होंगे।

अनुच्छेद 348 के खंड (2) के तहत कहा गया है कि खंड (1) के उपखंड (क) में किसी बात के होते हुए भी, किसी राज्य का राज्यपाल राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उस उच्च न्यायालय की कार्यवाहियों में, जिसका मुख्य स्थान उस राज्य में है, हिन्दी आषा का या उस राज्य के शासकीय प्रयोजनों कै लिए प्रयोग होने वाली किसी अन्य भाषा का प्रयोग प्राधिकृत कर सकेगा :

अनुच्छेद 348 का यह खंड पिछले प्रावधान के अपवाद स्वरूप है और भारत के उच्च न्यायालयों में कानूनी कार्यवाही में उपयोग की जाने वाली भाषा से संबंधित है।

इसमें कहा गया है कि किसी राज्य का राज्यपाल राष्ट्रपति की सहमति से उस राज्य में स्थित उच्च न्यायालय की कार्यवाही में हिंदी या राज्य में आधिकारिक उद्देश्यों के लिए उपयोग की जाने वाली किसी अन्य भाषा के उपयोग की अनुमति दे सकता है। हालाँकि, यह उच्च न्यायालय द्वारा जारी किसी भी निर्णय, डिक्री या आदेश पर लागू नहीं होता है।

दूसरे शब्दों में, यह खंड उच्च न्यायालयों में कानूनी कार्यवाही में उपयोग की जाने वाली भाषा में भाषायी विकल्प की अनुमति देता है। हालाँकि, इन भाषाओं का उपयोग राज्य के राज्यपाल और राष्ट्रपति द्वारा अधिकृत होना चाहिए और यह प्रावधान उच्च न्यायालय द्वारा लिए गए अंतिम निर्णयों पर लागू नहीं होता है।

अनुच्छेद 348 के खंड (3) के तहत कहा गया है कि खंड (1) के उपखंड (ख) में किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी राज्य के विधान-मंडल ने, उस विधान-मंडल में पुरःस्थापित विधेयकों में या उसके द्वारा पारित अधिनियमों में अथवा उस राज्य के राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेशों में अथवा उस उपखंड के पैरा (iii) में निर्दिष्ट किसी आदेश, नियम, विनियम या उपविधि में प्रयोग के लिए अंग्रेजी भाषा से भिन्‍न कोई भाषा विहित की है वहां उस राज्य के राजपत्र में उस राज्य के राज्यपाल के प्राधिकार से प्रकाशित अंग्रेजी भाषा में उसका अनुवाद इस अनुच्छेद के अधीन उसका अंग्रेजी भाषा में प्राधिकृत पाठ समझा जाएगा।

यदि किसी राज्य की विधायिका ने बिलों, अधिनियमों, अध्यादेशों, या किसी अन्य आदेश, नियम, विनियमन, में उपयोग के लिए अंग्रेजी के अलावा कोई अन्य भाषा निर्धारित की है तो अंग्रेजी भाषा में उसी का अनुवाद भी प्रकाशित करना होगा।

जो उस राज्य के आधिकारिक राजपत्र में राज्य के राज्यपाल के अधिकार के तहत प्रकाशित किया जाएगा, और उस अनुवादित भाग को अंग्रेजी में आधिकारिक पाठ माना जाएगा।

कहने का अर्थ है कि, यह खंड राज्य विधानमंडल को राज्य के भीतर कानूनों और विनियमों में अंग्रेजी के अलावा अन्य भाषाओं का उपयोग करने की अनुमति देता है, और इसे आधिकारिक बनाने के लिए, राज्य के सरकारी राजपत्र में अंग्रेजी भाषा में अनुवाद प्रकाशित किए जाने पर बल देता है। अनुवाद राज्य के राज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में होगा।

तो यही है अनुच्छेद 348, उम्मीद है आपको समझ में आया होगा। दूसरे अनुच्छेदों को समझने के लिए नीचे दिए गए लिंक का इस्तेमाल कर सकते हैं।

अनुच्छेद 343
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Related MCQs with Explanation

(a) The official languages of the Union
(b) The use of Hindi for official purposes of State Governments
(c) The power of the President to grant pardons, reprieves, commutations, remissions, and suspensions of sentences
(d) The languages to be used in High Courts and subordinate courts.

(a) English only
(b) The language of the State in which the Court is situated
(c) English and the language of the State, according to the choice of the presiding judge
(d) English and the language of the State, or both English and Hindi

Question 3: The special provisions of Article 348 regarding the use of languages in High Courts reflect the:

(a) Need for national unity and a common language for legal proceedings
(b) Importance of respecting the linguistic diversity of different regions
(c) Both (a) and (b)
(d) Neither (a) nor (b)

Question 4: Concerns and debates surrounding Article 348 often focus on:

(a) Ensuring adequate availability of legal resources and trained personnel in various languages
(b) The potential disadvantage faced by litigants not fluent in either English or the State language
(c) The impact of language on access to justice and equality before the law
(d) All of the above

Answer 1: (d) Explanation: Article 348 specifies the languages to be used in High Courts and subordinate courts within India.

Answer 2: (d) Explanation: The High Courts have the flexibility to use English, the language of the State, or both English and Hindi for conducting business.

Answer 3: (c) Explanation: Article 348 balances the need for a common language in judicial proceedings with the respect for regional languages and linguistic diversity. This reflects the complex linguistic landscape of India and the attempt to accommodate both national unity and regional identities.

Answer 4: (d) Explanation: The implementation of Article 348 raises questions about accessibility of legal services, potential disadvantages for certain litigants, and the broader issue of ensuring equal access to justice for all citizens regardless of their language proficiency.

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अनुच्छेद 349 – भारतीय संविधान
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Next and Previous to Article 348
भारतीय संविधान
संसद की बेसिक्स
मौलिक अधिकार बेसिक्स
भारत की न्यायिक व्यवस्था
भारत की कार्यपालिका
Important Pages of Compilation
अस्वीकरण – यहाँ प्रस्तुत अनुच्छेद और उसकी व्याख्या, मूल संविधान (उपलब्ध संस्करण), संविधान पर डी डी बसु की व्याख्या (मुख्य रूप से), प्रमुख पुस्तकें (एम. लक्ष्मीकान्त, सुभाष कश्यप, विद्युत चक्रवर्ती, प्रमोद अग्रवाल इत्यादि) एनसाइक्लोपीडिया, संबंधित मूल अधिनियम और संविधान के विभिन्न ज्ञाताओं (जिनके लेख समाचार पत्रों, पत्रिकाओं एवं इंटरनेट पर ऑडियो-विजुअल्स के रूप में उपलब्ध है) पर आधारित है। हमने बस इसे रोचक और आसानी से समझने योग्य बनाने का प्रयास किया है।