Article 347 of the Constitution | अनुच्छेद 347 व्याख्या

यह लेख Article 347 (अनुच्छेद 347) का यथारूप संकलन है। आप इस मूल अनुच्छेद का हिन्दी और इंग्लिश दोनों संस्करण पढ़ सकते हैं। आप इसे अच्छी तरह से समझ सके इसीलिए इसकी व्याख्या भी नीचे दी गई है आप उसे जरूर पढ़ें, और MCQs भी सॉल्व करें।

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📜 अनुच्छेद 347 (Article 347) – Original

भाग 17 [राजभाषा] अध्याय 2 – प्रादेशिक भाषाएं
347. किसी राज्य की जनसंख्या के किसी अनुभाग द्वारा बोली जाने वाली भाषा के संबंध में विशेष उपबंध— यदि इस निमित्त मांग किए जाने पर राष्ट्रपति का यह समाधान हो जाता है कि किसी राज्य की जनसंख्या का पर्याप्त आग यह चाहता है कि उसके द्वारा बोली जाने वाली भाषा को राज्य द्वारा मान्यता दी जाए तो वह निदेश दे सकेगा कि ऐसी भाषा को भी उस राज्य में सर्वत्र या उसके किसी भाग में ऐसे प्रयोजन के लिए, जो वह विनिर्दिष्ट करे, शासकीय मान्यता दी जाए ।
अनुच्छेद 347 हिन्दी संस्करण

Part XVII [OFFICIAL LANGUAGE] CHAPTER II.—REGIONAL LANGUAGES
347. Special provision relating to language spoken by a section of the population of a State— On a demand being made in that behalf the President may, if he is satisfied that a substantial proportion of the population of a State desire the use of any language spoken by them to be recognised by that State, direct that such language shall also be officially recognised throughout that State or any part thereof for such purpose as he may specify.
Article 347 English Version

🔍 Article 347 Explanation in Hindi

भारतीय संविधान का भाग 17, अनुच्छेद 343 से लेकर अनुच्छेद 351 तक में विस्तारित है जैसा कि आप देख सकते हैं यह पूरा भाग राजभाषा (Official Language) के बारे में है। इस भाग को तीन अध्यायों में बांटा गया है जिसे कि आप नीचे टेबल में देख सकते हैं;\

Chapters Titles Articles
I संघ की भाषा (Language of the Union) 343-344
II प्रादेशिक भाषाएं (Regional Language) 345-347
III उच्चतम एवं उच्च न्यायालयों आदि की भाषा (Language of Supreme and High Courts etc.) 348-349
IV विशेष निदेश (Special Directives) 350-351
Part 17 of the Constitution

इस लेख में हम “प्रादेशिक भाषाएं (Regional Language)” अध्याय के तहत आने वाले, अनुच्छेद 347 को समझने वाले हैं;

Article 120 (Language to be used in Parliament)
Article 210 (Language to be used in the Legislature)
Closely Related to Article 346

| अनुच्छेद 347 – किसी राज्य की जनसंख्या के किसी अनुभाग द्वारा बोली जाने वाली भाषा के संबंध में विशेष उपबंध (Special provision relating to language spoken by a section of the population of a State)

जैसा कि हम जानते हैं कि भारत एक भाषायी विविधता वाला देश है। 22 भाषाएँ तो सिर्फ संविधान में वर्णित है इसके अलावा भी विभिन्न भाषा परिवारों की सैंकड़ों भाषाएँ भारत में बोली जाती है।

अनुच्छेद 345 के तहत हमने राज्य की राजभाषा (Official language of the State) को बहुत ही विस्तारपूर्वक समझा है। अनुच्छेद 346 के तहत हमने एक राज्य और दूसरे राज्य के बीच या किसी राज्य और संघ के बीच पत्रादि की राजभाषा के बारे समझा।

अनुच्छेद 347 उसी अनुच्छेद का विस्तार है। यह अनुच्छेद किसी राज्य की जनसंख्या के किसी अनुभाग द्वारा बोली जाने वाली भाषा के संबंध में विशेष उपबंध की बात करता है।

अनुच्छेद 347 के तहत कहा गया है कि यदि इस निमित्त मांग किए जाने पर राष्ट्रपति का यह समाधान हो जाता है कि किसी राज्य की जनसंख्या का पर्याप्त आग यह चाहता है कि उसके द्वारा बोली जाने वाली भाषा को राज्य द्वारा मान्यता दी जाए तो वह निदेश दे सकेगा कि ऐसी भाषा को भी उस राज्य में सर्वत्र या उसके किसी भाग में ऐसे प्रयोजन के लिए, जो वह विनिर्दिष्ट करे, शासकीय मान्यता दी जाए।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 347 किसी राज्य के भीतर आबादी के महत्वपूर्ण वर्गों द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं की मान्यता से संबंधित है। यह इन भाषाओं को राज्य की आधिकारिक भाषाओं के साथ-साथ कुछ आधिकारिक उद्देश्यों के लिए उपयोग करने की अनुमति देता है।

मुख्य बिंदुओं का विवरण कुछ इस प्रकार है:

  • मांग पर: किसी राज्य की आबादी का कोई भी बड़ा हिस्सा आधिकारिक उद्देश्यों के लिए अपनी भाषा (उस राज्य के भीतर बोली जाने वाली) को मान्यता देने की मांग कर सकता है।
  • राष्ट्रपति का निर्णय: ऐसी मांग पर, भारत के राष्ट्रपति अपनी संतुष्टि के आधार पर, राज्य को आधिकारिक तौर पर भाषा को मान्यता देने का निर्देश दे सकते हैं।
  • मान्यता का दायरा: राष्ट्रपति भाषा के लिए मान्यता की सीमा निर्दिष्ट कर सकते हैं, जैसे:
    • कुछ क्षेत्रों में प्रशासनिक या न्यायिक कार्यवाही में उपयोग करें।
    • राज्य और केंद्र सरकार के बीच संचार के लिए उपयोग।
    • शैक्षणिक संस्थानों में उपयोग.

सुरक्षा उपाय और सीमाएँ:

  • राष्ट्रपति के निर्णय से राज्य में उपयोग की जाने वाली सभी भाषाओं की सुरक्षा और विकास सुनिश्चित होना चाहिए।
  • अनुच्छेद 347 के तहत एक भाषा की मान्यता राज्य की आधिकारिक भाषा (भाषाओं) को प्रभावित नहीं करती है।
  • संविधान के विशिष्ट प्रावधानों के अनुसार, क्षेत्रीय भाषाओं के साथ-साथ आधिकारिक उद्देश्यों के लिए अंग्रेजी का उपयोग जारी रहेगा।

अनुच्छेद 347 का महत्व:

  • राज्यों के भीतर भाषाई विविधता और सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देता है।
  • विभिन्न आबादी द्वारा समझी जाने वाली भाषाओं में सार्वजनिक सेवाओं और प्रशासन तक पहुंच प्रदान करता है।
  • मान्यता प्राप्त भाषाएँ बोलने वाले लोगों के लिए राज्य के आधिकारिक कार्यों में उचित प्रतिनिधित्व और भागीदारी सुनिश्चित करता है।

चुनौतियाँ और विवाद:

  • जनसंख्या के “बड़े हिस्से” को परिभाषित करना और भाषा की माँगों को मापना।
  • प्रशासनिक व्यावहारिकता और संसाधन आवंटन के साथ कई भाषाओं की मान्यता को संतुलित करना।
  • किसी राज्य के भीतर प्रमुख भाषाओं और मान्यता प्राप्त भाषाओं के बीच संभावित तनाव।

कुल मिलाकर यह अनुच्छेद भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए एक सुरक्षा उपाय के रूप में कार्य करता है और यह सुनिश्चित करता है कि उनकी भाषाओं के उपयोग और संरक्षण के उनके अधिकार सुरक्षित हैं। यह एक महत्वपूर्ण प्रावधान है जो भारतीय समाज की बहुसांस्कृतिक और बहुभाषी प्रकृति को दर्शाता है।

तो यही है अनुच्छेद 347, उम्मीद है आपको समझ में आया होगा। दूसरे अनुच्छेदों को समझने के लिए नीचे दिए गए लिंक का इस्तेमाल कर सकते हैं।

अनुच्छेद 343
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सवाल-जवाब के लिए टेलीग्राम जॉइन करें; टेलीग्राम पर जाकर सर्च करे – @upscandpcsofficial

Related MCQs with Explanation

(a) Balancing the development and promotion of various Scheduled Languages.
(b) Addressing regional sensitivities and respecting the historical contexts of different languages.
(c) Providing adequate funding and infrastructure for the development of script, literature, and educational resources in each Scheduled Language.
(d) All of the above.

Answer: (d) Explanation: Effectively implementing Article 347 necessitates a holistic approach that balances the needs of different languages, acknowledges regional considerations, and ensures sufficient resources for the continued growth and development of each Scheduled Language.

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अस्वीकरण – यहाँ प्रस्तुत अनुच्छेद और उसकी व्याख्या, मूल संविधान (उपलब्ध संस्करण), संविधान पर डी डी बसु की व्याख्या (मुख्य रूप से), प्रमुख पुस्तकें (एम. लक्ष्मीकान्त, सुभाष कश्यप, विद्युत चक्रवर्ती, प्रमोद अग्रवाल इत्यादि) एनसाइक्लोपीडिया, संबंधित मूल अधिनियम और संविधान के विभिन्न ज्ञाताओं (जिनके लेख समाचार पत्रों, पत्रिकाओं एवं इंटरनेट पर ऑडियो-विजुअल्स के रूप में उपलब्ध है) पर आधारित है। हमने बस इसे रोचक और आसानी से समझने योग्य बनाने का प्रयास किया है।