Article 316 of the Constitution | अनुच्छेद 316 व्याख्या

यह लेख Article 316 (अनुच्छेद 316) का यथारूप संकलन है। आप इस मूल अनुच्छेद का हिन्दी और इंग्लिश दोनों संस्करण पढ़ सकते हैं। आप इसे अच्छी तरह से समझ सके इसीलिए इसकी व्याख्या भी नीचे दी गई है आप उसे जरूर पढ़ें, और MCQs भी सॉल्व करें।

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📜 अनुच्छेद 316 (Article 316) – Original

भाग 14 [संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं] अध्याय 2 – लोक सेवा आयोग
316. सदस्यों की नियुक्ति और पदावधि— (1) लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति, यदि वह संघ आयोग या संयुक्त आयोग है तो, राष्ट्रपति द्वारा और, यदि वह राज्य आयोग है तो, राज्य के राज्यपाल 1** द्वारा की जाएगी ;

परंतु प्रत्येक लोक सेवा आयोग के सदस्यों में से यथाशक्य निकटतम आधे ऐसे व्यक्ति होंगे जो अपनी-अपनी नियुक्ति की तारीख पर भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन कम से कम दस वर्ष तक पद धारण कर चुके हैं और उक्त दस वर्ष की अवधि की संगणना करने में इस संविधान के प्रारंभ से पहले की ऐसी अवधि भी सम्मिलित की जाएगी जिसके दौरान किसी व्यक्ति ने भारत में क्राउन के अधीन या किसी देशी राज्य की सरकार के अधीन पद धारण किया है।

1[(1क) यदि आयोग के अध्यक्ष का पद रिक्त हो जाता है या यदि कोई ऐसा अध्यक्ष अनुपस्थिति के कारण या अन्य कारण से अपने पद के कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ है तो, यथास्थिति, जब तक रिक्त पद पर खंड (1) के अधीन नियुक्त कोई व्यक्ति उस पद का कर्तव्य भार ग्रहण नहीं कर लेता है या जब तक अध्यक्ष अपने कर्तव्यों को फिर से नहीं संभाल लेता है तब तक आयोग के अन्य सदस्यों में से ऐसा एक सदस्य, जिसे संघ आयोग या संयुक्त आयोग की दशा में राष्ट्रपति और राज्य आयोग की दशा में उस राज्य का राज्यपाल इस प्रयोजन के लिए नियुक्त करे, उन कर्तव्यों का पालन करेगा।]

(2) लोक सेवा आयोग का सदस्य, अपने पद ग्रहण की तारीख से छह वर्ष की अवधि तक या संघ आयोग की दशा में पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक और राज्य आयोग या संयुक्त आयोग की दशा में 2[बासठ वर्ष] की आयु प्राप्त कर लेने तक इनमें से जो भी पहले हो, अपना पद धारण करेगा:

परंतु –

(क) लोक सेवा आयोग का कोई सदस्य, संघ आयोग या संयुक्त आयोग की दशा में राष्ट्रपति को और राज्य आयोग की दशा में राज्य के राज्यपाल 3*** को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा ;

(ख) लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को, अनुच्छेद 317 के खंड (1) या खंड (3) में उपबंधित रीति से उसके पद से हटाया जा सकेगा।

(3) कोई व्यक्ति जो लोक सेवा आयोग के सदस्य के रूप में पद धारण करता है, अपनी पदावधि की समाप्ति पर उस पद पर पुनर्नियुक्ति का पात्र नहीं होगा।
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1. संविधान (पन्द्रहवां संशोधन) अधिनियम, 1963 की धारा 1 द्वारा (5-10-1963 से) अंतःस्थापित।
2. संविधान (इकतालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1976 की धारा 2 द्वारा “साठ वर्ष” के स्थान पर (7-9-1976 से) प्रतिस्थापित।
3. संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 29 और अनुसूची द्वारा “या राजप्रमुख” शब्दों का (1-11-1956 से) लोप किया गया।

अनुच्छेद 316 हिन्दी संस्करण

Part XIV [SERVICES UNDER THE UNION AND THE STATES] CHAPTER II.— PUBLIC SERVICE COMMISSIONS
316. Appointment and term of office of members— (1) The Chairman and other members of a Public Service Commission shall be appointed, in the case of the Union Commission or a Joint Commission, by the President, and in the case of a State Commission, by the Governor of the State:

Provided that as nearly as may be one-half of the members of every Public Service Commission shall be persons who at the dates of their respective appointments have held office for at least ten years either under the
Government of India or under the Government of a State, and in computing the said period of ten years any period before the commencement of this Constitution during which a person has held office under the Crown in India or under the Government of an Indian State shall be included.

1[(1A) If the office of the Chairman of the Commission becomes vacant or if any such Chairman is by reason of absence or for any other reason unable to perform the duties of his office, those duties shall, until some person appointed under clause (1) to the vacant office has entered on the duties thereof or, as the case may be, until the Chairman has resumed his duties, be performed by such one of the other members of the Commission as the President, in the case of the Union Commission or a Joint Commission, and the Governor of the State in the case of a State Commission, may appoint for the purpose.]

(2) A member of a Public Service Commission shall hold office for a term of six years from the date on which he enters upon his office or until he attains, in the case of the Union Commission, the age of sixty-five years, and in
the case of a State Commission or a Joint Commission, the age of 2[sixty-two years], whichever is earlier:

Provided that—
(a) a member of a Public Service Commission may, by writing under his hand addressed, in the case of the Union Commission or a Joint Commission, to the President, and in the case of a State Commission, to the Governor 3*** of the State, resign his office;
(b) a member of a Public Service Commission may be removed from his office in the manner provided in clause (1) or clause (3) of article 317.

(3) A person who holds office as a member of a Public Service Commission shall, on the expiration of his term of office, be ineligible for reappointment to that office.
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1. Ins. by the Constitution (Fifteenth Amendment) Act, 1963, s. 11 (w.e.f. 5-10-1963).
2. Subs. by the Constitution (Forty-first Amendment) Act, 1976, s. 2, for “sixty years” (w.e.f. 7-9-1976).
3 . The words “or Rajpramukh” omitted by the Constitution (Seventh Amendment) Act, 1956, s. 29 and Sch. (w.e.f. 1-11-1956).

Article 316 English Version

🔍 Article 316 Explanation in Hindi

भारतीय संविधान का भाग 14, अनुच्छेद 308 से लेकर अनुच्छेद 323 तक में विस्तारित है जैसा कि आप देख सकते हैं यह पूरा भाग संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं (SERVICES UNDER THE UNION AND THE STATES) के बारे में है। जो कि दो अध्याय में बंटा हुआ है जिसे कि आप नीचे चार्ट में देख सकते हैं;

Chapters Subject Articles
I सेवाएं (Services) 308 – 314
II लोक सेवा आयोग (Public Services Commissions) 315 – 323
Part 14 of the Constitution

इस लेख में हम दूसरे अध्यायलोक सेवा आयोग (Public Services Commissions) ” के तहत आने वाले अनुच्छेद 316 को समझने वाले हैं;

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)
Closely Related to Article 316

| अनुच्छेद 316 – सदस्यों की नियुक्ति और पदावधि (Appointment and term of office of members)

अनुच्छेद 316 के तहत संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग (Public Service Commissions for the Union and for the States) की व्यवस्था की है। इस अनुच्छेद के तहत कुल 3 खंड आते हैं;

अनुच्छेद 316 के खंड (1) के तहत कहा गया है कि लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति, यदि वह संघ आयोग या संयुक्त आयोग है तो, राष्ट्रपति द्वारा और, यदि वह राज्य आयोग है तो, राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाएगी ;

यहां तीन बातें हैं;

1) संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा किया जाएगा;

2) संयुक्त लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा किया जाएगा;

3) राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा किया जाएगा।

हालांकि यहां यह याद रखिए कि प्रत्येक लोक सेवा आयोग के सदस्यों में से लगभग आधे ऐसे व्यक्ति होंगे जो अपनी-अपनी नियुक्ति की तारीख पर भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन कम से कम दस वर्ष तक पद धारण कर चुके हैं।

और उक्त दस वर्ष की अवधि की गणना करने में इस संविधान के प्रारंभ से पहले की ऐसी अवधि भी सम्मिलित की जाएगी जिसके दौरान किसी व्यक्ति ने भारत में क्राउन के अधीन या किसी देशी राज्य की सरकार के अधीन पद धारण किया है।

यहां यह भी याद रखें कि यदि आयोग के अध्यक्ष का पद रिक्त हो जाता है या यदि कोई ऐसा अध्यक्ष अनुपस्थिति के कारण या अन्य कारण से अपने पद के कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ है तो, यथास्थिति, जब तक रिक्त पद पर खंड (1) के अधीन नियुक्त कोई व्यक्ति उस पद का कर्तव्य भार ग्रहण नहीं कर लेता है तब तक आयोग के अन्य सदस्यों में से ऐसा एक सदस्य,उन कर्तव्यों का पालन करेगा; जिसे कि संघ आयोग या संयुक्त आयोग की दशा में राष्ट्रपति और राज्य आयोग की दशा में उस राज्य का राज्यपाल इस प्रयोजन के लिए नियुक्त करे;

अनुच्छेद 316 के खंड (2) के तहत कहा गया है कि लोक सेवा आयोग का सदस्य, अपने पद ग्रहण की तारीख से छह वर्ष की अवधि तक या संघ आयोग की दशा में पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक और राज्य आयोग या संयुक्त आयोग की दशा में बासठ वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक इनमें से जो भी पहले हो, अपना पद धारण करेगा;

कहने का अर्थ है कि संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य छह वर्षों तक या फिर पैंसठ वर्ष की आयु तक (जो भी पहले हो) अपना पद धारण करेगा। वहीं राज्य आयोग या संयुक्त राज्य आयोग के सदस्य छह वर्षों तक या फिर बासठ वर्ष की आयु तक ( जो भी पहले हो) पद धारण करेगा।

हालांकि यहां पर दो बातें याद रखिए;

(1) संघ लोक सेवा आयोग, या संयुक्त आयोग का कोई सदस्य राष्ट्रपति को और राज्य आयोग का कोई सदस्य राज्य के राज्यपाल को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा ;

(1) लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को, अनुच्छेद 317 के खंड (1) या खंड (3) में उपबंधित रीति से उसके पद से हटाया जा सकेगा। अनुच्छेद 317 में कौन सा तरीका है; यह जानने के लिए इस लेख को पढ़ें।

अनुच्छेद 316 के खंड (3) के तहत कहा गया है कि कोई व्यक्ति जो लोक सेवा आयोग के सदस्य के रूप में पद धारण करता है, अपनी पदावधि की समाप्ति पर उस पद पर पुनर्नियुक्ति (re-appointment) का पात्र नहीं होगा।

तो यही है अनुच्छेद 316 , उम्मीद है आपको समझ में आया होगा। दूसरे अनुच्छेदों को समझने के लिए नीचे दिए गए लिंक का इस्तेमाल कर सकते हैं।

◾ राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC)
Must Read

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Related MCQs with Explanation

Question 1: Article 316 of the Indian Constitution deals with:

(a) The appointment and term of office of members of a Public Service Commission
(b) The power of the Union Government to levy taxes on goods and services
(c) The power of the State Governments to levy surcharges on the taxes levied by the Union Government
(d) The power of the Union Government to collect and distribute the Compensation Cess




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Answer: (a) Explanation: Article 316 of the Indian Constitution deals with the appointment and term of office of members of a Public Service Commission. It states that the Chairman and other members of a Public Service Commission shall be appointed, in the case of the Union Commission or a Joint Commission, by the President, and in the case of a State Commission, by the Governor of the State.


Question 2: The term of office of a member of a Public Service Commission is:

(a) Five years
(b) Six years
(c) Seven years
(d) Eight years




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Answer: (b) Explanation: The term of office of a member of a Public Service Commission is six years from the date on which they enter upon their office or until they attain, in the case of the Union Commission, the age of sixty-five years, and in the case of a State Commission or a Joint Commission, the age of sixty-two years, whichever is earlier.


Question 3: A member of a Public Service Commission can resign from their office by writing to:

(a) The President, in the case of the Union Commission or a Joint Commission
(b) The Chief Justice of High court of the State, in the case of a State Commission
(c) The Cabinet, in the case of the Joint Commission
(d) None of the Above




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Answer: (a) Explanation: A member of a Public Service Commission can resign from their office by writing to the President, in the case of the Union Commission or a Joint Commission, or to the Governor of the State, in the case of a State Commission.


Question 4: A member of a Public Service Commission can be removed from their office for:

(a) Misconduct
(b) Inefficiency
(c) Negligence
(d) All of the above




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Answer: (d) Explanation: A member of a Public Service Commission can be removed from their office for misconduct, inefficiency, negligence, or any other cause which, in the opinion of the President, renders the member unfit to hold the office.


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Next and Previous to Article 316
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मौलिक अधिकार बेसिक्स
भारत की न्यायिक व्यवस्था
भारत की कार्यपालिका
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अस्वीकरण – यहाँ प्रस्तुत अनुच्छेद और उसकी व्याख्या, मूल संविधान (उपलब्ध संस्करण), संविधान पर डी डी बसु की व्याख्या (मुख्य रूप से), प्रमुख पुस्तकें (एम. लक्ष्मीकान्त, सुभाष कश्यप, विद्युत चक्रवर्ती, प्रमोद अग्रवाल इत्यादि) एनसाइक्लोपीडिया, संबंधित मूल अधिनियम और संविधान के विभिन्न ज्ञाताओं (जिनके लेख समाचार पत्रों, पत्रिकाओं एवं इंटरनेट पर ऑडियो-विजुअल्स के रूप में उपलब्ध है) पर आधारित है। हमने बस इसे रोचक और आसानी से समझने योग्य बनाने का प्रयास किया है।