Article 295 of the Constitution | अनुच्छेद 295 व्याख्या

यह लेख Article 295 (अनुच्छेद 295) का यथारूप संकलन है। आप इस मूल अनुच्छेद का हिन्दी और इंग्लिश दोनों संस्करण पढ़ सकते हैं। आप इसे अच्छी तरह से समझ सके इसीलिए इसकी व्याख्या भी नीचे दी गई है आप उसे जरूर पढ़ें, और MCQs भी सॉल्व करें।

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📜 अनुच्छेद 295 (Article 295) – Original

भाग 12 [वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद] अध्याय 3 – संपति, संविदाएं अधिकार, दायित्व, बाध्यताएं ऑर वाद
295. अन्य दशाओं में संपत्ति, आस्तियों, अधिकारों, दायित्वों और बाध्यताओं का उत्तराधिकार— (1) इस संविधान के प्रारंभ से ही

(क) जो संपत्ति और आस्तियां ऐसे प्रारंभ से ठीक पहले पहली अनुसूची के भाग ख में विनिर्दिष्ट राज्य के तत्स्थानी किसी देशी राज्य में निहित थीं, वे सभी ऐसे करार के अधीन रहते हुए, जो भारत सरकार इस निमित्त उस राज्य की सरकार से करे, संघ में निहित होंगी यदि वे प्रयोजन जिनके लिए ऐसे प्रारंभ से ठीक पहले ऐसी संपत्ति और आस्तियां धारित थीं, तत्पश्चात्‌ संघ सूची में प्रगणित किसी विषय से संबंधित संघ के प्रयोजन हों, और

(ख) जो अधिकार, दायित्व और बाध्यताएं पहली अनुसूची के भाग ख में विनिर्दिष्ट राज्य के तत्स्थानी किसी देशी राज्य की सरकार की थीं, चाहे वे किसी संविदा से या अन्यथा उद्भूत हुई हों, वे सभी ऐसे करार के अधीन रहते हुए, जो भारत सरकार इस निमित्त उस राज्य की सरकार से करे, भारत सरकार के अधिकार, दायित्व और बाध्यताएं होंगी यदि वे प्रयोजन, जिनके लिए ऐसे प्रारंभ से ठीक पहले ऐसे अधिकार अर्जित किए गए थे अथवा ऐसे दायित्व या बाध्यताएं उपगत की गई थीं, तत्पश्चात्‌ संघ सूची में प्रगणित किसी विषय से संबंधित भारत सरकार के प्रयोजन हों।

(2) जैसा ऊपर कहा गया है उसके अधीन रहते हुए, पहली अनुसूची के भाग ख में विनिर्दिष्ट प्रत्येक राज्य की सरकार, उन सभी संपत्ति और आस्तियों तथा उन सभी अधिकारों, दायित्वों और बाध्यताओं के संबंध में, चाहे वे किसी संविदा से या अन्यथा उद्धृत हुई हों, जो खंड (1) में निर्दिष्ट से भिन्‍न हैं, इस संविधान के प्रारंभ से ही तत्स्थानी देशी राज्य की सरकार की उत्तराधिकारी होगी।

अनुच्छेद 295 हिन्दी संस्करण

Part XII [FINANCE, PROPERTY, CONTRACTS AND SUITS] Chapter 3 – PROPERTY, CONTRACTS, RIGHTS, LIABILITIES, OBLIGATIONS AND SUITS
295. Succession to property, assets, rights, liabilities and obligations in other cases— (1) As from the commencement of this Constitution—
(a) all property and assets which immediately before such commencement were vested in any Indian State corresponding to a State specified in Part B of the First Schedule shall vest in the Union, if the purposes for which such property and assets were held immediately before such commencement will thereafter be purposes of the Union relating to any of the matters enumerated in the Union List, and

(b) all rights, liabilities and obligations of the Government of any Indian State corresponding to a State specified in Part B of the First Schedule, whether arising out of any contract or otherwise, shall be the rights, liabilities and obligations of the Government of India, if the purposes for which such rights were acquired or liabilities or obligations were incurred before such commencement will thereafter be purposes of the Government of India relating to any of the matters enumerated in the Union List, subject to any agreement entered into in that behalf by the Government of India with the Government of that State.

(2) Subject as aforesaid, the Government of each State specified in Part B of the First Schedule shall, as from the commencement of this Constitution, be the successor of the Government of the corresponding Indian State as regards all property and assets and all rights, liabilities and obligations, whether arising out of any contract or otherwise, other than those referred to in clause (1).

Article 295 English Version

🔍 Article 295 Explanation in Hindi

भारतीय संविधान का भाग 12, अनुच्छेद 264 से लेकर अनुच्छेद 300क तक कुल 4अध्यायों (Chapters) में विस्तारित है (जिसे कि आप नीचे टेबल में देख सकते हैं)।

Chapters Title Articles
I वित्त (Finance) Article 264 – 291
II उधार लेना (Borrowing) Article 292 – 293
III संपत्ति संविदाएं, अधिकार, दायित्व, बाध्यताएं और वाद (PROPERTY, CONTRACTS, RIGHTS, LIABILITIES, OBLIGATIONS AND SUITS) Article 294 – 300
IV संपत्ति का अधिकार (Rights to Property) Article 300क
[Part 11 of the Constitution]

जैसा कि आप देख सकते हैं यह पूरा भाग संपत्ति संविदाएं, अधिकार, दायित्व, बाध्यताएं और वाद (PROPERTY, CONTRACTS, RIGHTS, LIABILITIES, OBLIGATIONS AND SUITS) के बारे में है।

संविधान का यही वह भाग है जिसके अंतर्गत हम निम्नलिखित चीज़ें पढ़ते हैं;

  • कर व्यवस्था (Taxation System)
  • विभिन्न प्रकार की निधियाँ (different types of funds)
  • संघ और राज्यों के बीच राजस्वों का वितरण (Distribution of revenues between the Union and the States)
  • भारत सरकार या राज्य सरकार द्वारा उधार लेने की व्यवस्था (Borrowing arrangement by Government of India or State Government)
  • संपत्ति का अधिकार (Rights to Property), इत्यादि।

संविधान के इस भाग (भाग 12) का तीसरा अध्याय, संपत्ति संविदाएं, अधिकार, दायित्व, बाध्यताएं और वाद (PROPERTY, CONTRACTS, RIGHTS, LIABILITIES, OBLIGATIONS AND SUITS) से संबंधित है। इस लेख में हम अनुच्छेद 295 को समझने वाले हैं;

केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध Center-State Financial Relations)
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| अनुच्छेद 295 – अन्य दशाओं में संपत्ति, आस्तियों, अधिकारों, दायित्वों और बाध्यताओं का उत्तराधिकार (Succession to property, assets, rights, liabilities and obligations in other cases)

Article 295 के तहत अन्य दशाओं में संपत्ति, आस्तियों, अधिकारों, दायित्वों और बाध्यताओं का उत्तराधिकार का वर्णन है। इस अनुच्छेद के तहत दो खंड आते हैं और यह अनुच्छेद पिछले अनुच्छेद (अनुच्छेद 294) का ही विस्तार है, इसीलिए पहले उसे अवश्य पढ़ें;

अनुच्छेद 295 के खंड (1) के तहत मुख्य रूप से दो बातें की गई है;

पहली बात) इस संविधान के प्रारंभ से ही, वे संपत्तियां जो संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले पहली अनुसूची के भाग ख में विनिर्दिष्ट राज्य के तत्स्थानी किसी देशी राज्य में निहित थीं, वे सभी ऐसे करार के अधीन रहते हुए, जो भारत सरकार इस निमित्त उस राज्य की सरकार से करे, संघ में निहित होंगी यदि वे प्रयोजन जिनके लिए ऐसे प्रारंभ से ठीक पहले ऐसी संपत्तियां धारित थीं, तत्पश्चात्‌ संघ सूची में प्रगणित किसी विषय से संबंधित संघ के प्रयोजन हों।

जैसा कि हम जानते हैं कि मूल संविधान के तहत भारतीय संघ के राज्यों को चार प्रकार से वर्गीकृत किया गया था – भाग ‘क’भाग ‘ख’भाग ‘ग’, एवं भाग ‘घ’। ये सभी संख्या में 29 थे ।

भाग ‘क’ में वे राज्य थे, जहां ब्रिटिश भारत में गवर्नर का शासन था। यानी कि एक निर्वाचित गवर्नर और राज्य विधायिका द्वारा शासित था। ये संख्या में 9 था।

भाग ‘ख’ में उन 9 राज्यों को शामिल किया गया था जहाँ शाही शासन (princely states) था। और जो राजप्रमुख द्वारा शासित था। [इसी भाग का जिक्र इस अनुच्छेद के तहत किया गया है]

भाग ‘ग’ में ब्रिटिश भारत के मुख्य आयुक्त का शासन एवं कुछ में शाही शासन था।

◾ अंडमान एवं निकोबार द्वीप को अकेले भाग ‘घ’ में रखा गया था। 

भाग ‘क’ भाग ‘ख’ भाग ‘ग’ भाग ‘घ’
1. असम 1. हैदराबाद 1. अजमेर 1. अंडमान & निकोबार द्वीप समूह
2. बिहार 2. J & K 2. बिलासपुर  
3. बंबई 3. मध्य भारत 3. भोपाल  
4. मध्यप्रदेश 4. मैसूर 4. कूच बिहार  
5. मद्रास 5. पटियाला & पूर्वी पंजाब 5. दिल्ली  
6. ओड़ीसा 6. राजस्थान 6. कुर्ग  
7. पंजाब 7. सौराष्ट्र 7. हिमाचल प्रदेश  
8. संयुक्त प्रांत 8. विंध्य प्रदेश 8. कच्छ  
9. पश्चिम बंगाल 9. त्रावणकोर-कोचीन 9. मणिपुर  
    10. त्रिपुरा  
भारतीय राज्यों के बनने की कहानी↗

कुल मिलाकर यहां समझने की बात यह है कि संविधान से लागू होने के साथ ही वे सभी संपत्तियाँ जो कि उपरोक्त टेबल के भाग ख के राज्यों के अधीन था वो संघ (केंद्र) के अधीन हो जाएगा अगर संघ सूची में प्रगणित किसी विषय से संबंधित संघ के प्रयोजन हों।

हालांकि यह भारत सरकार द्वारा उस राज्य की सरकार के साथ किए गए किसी भी समझौते के अधीन है।

दूसरी बात) इस संविधान के प्रारंभ से ही जो अधिकार, दायित्व और बाध्यताएं पहली अनुसूची के भाग ख में विनिर्दिष्ट राज्य के तत्स्थानी किसी देशी राज्य की सरकार की थीं, चाहे वे किसी संविदा से या अन्यथा उद्भूत हुई हों, वे सभी ऐसे करार के अधीन रहते हुए, जो भारत सरकार इस निमित्त उस राज्य की सरकार से करे, भारत सरकार के अधिकार, दायित्व और बाध्यताएं होंगी यदि वे प्रयोजन, जिनके लिए ऐसे प्रारंभ से ठीक पहले ऐसे अधिकार अर्जित किए गए थे अथवा ऐसे दायित्व या बाध्यताएं उपगत की गई थीं, तत्पश्चात्‌ संघ सूची में प्रगणित किसी विषय से संबंधित भारत सरकार के प्रयोजन हों।

पहली अनुसूची के भाग ख के राज्यों के अनुरूप किसी भी भारतीय राज्य की सरकार के सभी अधिकार, देनदारियां और दायित्व भारत सरकार के अधिकार, देनदारियां और दायित्व होंगे।

लेकिन तभी यदि ऐसे उद्देश्य जिनके लिए ऐसे अधिकार या देनदारियां या दायित्व संविधान के प्रारंभ से पहले अर्जित किए गए थे और उसके बाद तत्पश्चात्‌ संघ सूची के किसी विषय से संबंधित भारत सरकार के प्रयोजन हों।

हालांकि यह भारत सरकार द्वारा उस राज्य की सरकार के साथ किए गए किसी भी समझौते के अधीन है।

अनुच्छेद 295 के खंड (2) के तहत कहा गया है कि जैसा ऊपर कहा गया है उसके अधीन रहते हुए, पहली अनुसूची के भाग ख में विनिर्दिष्ट प्रत्येक राज्य की सरकार, उन सभी संपत्ति और आस्तियों तथा उन सभी अधिकारों, दायित्वों और बाध्यताओं के संबंध में, चाहे वे किसी संविदा से या अन्यथा उद्धृत हुई हों, जो खंड (1) में निर्दिष्ट से भिन्‍न हैं, इस संविधान के प्रारंभ से ही तत्स्थानी देशी राज्य की सरकार की उत्तराधिकारी होगी।

पहली अनुसूची के भाग ख के राज्यों की सरकार, उन सभी संपत्तियों तथा उन सभी अधिकारों, दायित्वों और बाध्यताओं के संबंध में, चाहे वे किसी करार से या अन्यथा उद्धृत हुई हों, लेकिन अगर वो खंड (1) में बताए गए व्यवस्था से भिन्‍न हैं, तो इस संविधान के प्रारंभ से ही संबन्धित देशी राज्य की सरकार के अधीन होगा।

हालांकि यह व्यवस्था खंड (1) के अधीन है।

तो यही है अनुच्छेद 295 , उम्मीद है आपको समझ में आया होगा। दूसरे अनुच्छेदों को समझने के लिए नीचे दिए गए लिंक का इस्तेमाल कर सकते हैं।

Article 294 of the Constitution | अनुच्छेद 294 व्याख्या
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Chapter Wise Polity Quiz

केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध अभ्यास प्रश्न

  1. Number of Questions – 8
  2. Passing Marks – 75 %
  3. Time – 6 Minutes
  4. एक से अधिक विकल्प सही हो सकते हैं।



1 / 8

दिए गए कथनों पर विचार करें एवं सही कथनों का चुनाव करें।

  1. अनुच्छेद 269 अंतर्राज्यीय व्यापार और वाणिज्य में क्रय-विक्रय से संबन्धित कर के बारे में बताता है।
  2. अनुच्छेद 269’क’ अंतर्राज्यिक व्यापार या वाणिज्य के दौरान वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी भारत सरकार द्वारा उद्गृहित और संगृहीत किया जाएगा।
  3. अनुच्छेद 269’क’ के तहत व्यवस्था को IGST कहा जाता है।
  4. अनुच्छेद 269 के तहत अधिभार (Surcharge) की बात कही गई है।



2 / 8

वित्तीय संबंध के बारे में इनमें से कौन सा कथन सत्य है?



3 / 8

अनुच्छेद 268 के संबंध में इनमें से कौन सा कथन गलत है?

  1. इस अनुच्छेद के अंतर्गत आनेवाले कर (Tax) राज्य के खाते में जाता है।
  2. विनिमय पत्रों, चेकों, वादा नोटों एवं बीमा तथा शेयरों के अंतरण इसके तहत करों के विषय है।
  3. एल्कोहल इसी के तहत एक विषय है जिसे कि 2020 में जीएसटी के दायरे में लाया गया।
  4. 88वां संविधान संशोधन 2003 से इसमें संशोधन करके ‘सेवा कर’ लाया गया जो कि आज भी इसके तहत चल रहा है।



4 / 8

दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन करें।

  1. राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान राष्ट्रपति चाहे तो वित्तीय अंतरण (Financial transfer) को कम कर सकता है।
  2. वित्तीय आपातकाल के दौरान राष्ट्रपति राज्य की सेवा में लगे कर्मचारियों के वेतन और भत्ते कम कर सकता है।
  3. अनुच्छेद 286 के तहत, केंद्र की सम्पत्ति को राज्य के सभी करों से छूट मिलेगी।
  4. अनुच्छेद 289 के तहत, राज्य की परिसंपत्तियों या आय को केन्द्रीय करों से छूट प्राप्त है।



5 / 8

ऋण को ध्यान में रखकर दिए गए कथनों में से सही कथन की पहचान करें।

  1. अनुच्छेद 291 के तहत, केंद्र अगर चाहे तो भारत या भारत के बाहर से संचित निधि की गारंटी पर ऋण ले सकता है।
  2. अगर कोई राज्य भारत में कहीं से ऋण लेता है तो वो अनुच्छेद 293(1) के तहत ले सकता है
  3. अनुच्छेद 292(2) के तहत, केंद्र सरकार भी राज्यों को ऋण दे सकती है।
  4. अगर राज्य के ऊपर पहले से ही बकाया ऋण हो तो राज्य फिर से दूसरा ऋण केंद्र की अनुमति के बिना नहीं ले सकता।



6 / 8

करों के बँटवारे के संबंध में इनमें से कौन सा कथन सत्य है?

  1. संघ सूची के विषय संख्या 82, 83 एवं 84 पर केंद्र कर लगाता है।
  2. राज्य सूची के विषय संख्या 46, 51, 53 एवं 54 पर राज्य कर लगाता है।
  3. समवर्ती सूची के विषय संख्या 43, 44 और 47 पर केंद्र और राज्य दोनों कर लगाता है।
  4. तीनों सूचियों के बाहर के किसी विषय पर केंद्र और राज्य दोनों मिलकर टैक्स लगाता है।



7 / 8

दिए गए कथनों में से सही कथनों का चुनाव करें।

  1. वित्त आयोग अनुच्छेद 280 के तहत एक अर्ध-न्यायिक निकाय है।
  2. अनुच्छेद 271 के तहत अधिभार (surcharge) लगाया जाता है।
  3. सेस जिस काम के लिए लगाया जाता है उसी काम में इसे खर्च करना पड़ता है।
  4. अनुच्छेद 246 और अनुच्छेद 254 में किसी बात के होते हुए भी, संसद को, संघ द्वारा या राज्य द्वारा लगाए गए जीएसटी के संबंध में विधियाँ बनाने की शक्ति होगी।



8 / 8

अनुदान के संबंध में केंद्र-राज्य संबंध को ध्यान में रखते हुए कौन सा कथन सही है?

  1. अनुच्छेद 276 ये कहता है कि जब भी किसी राज्य को अनुदान की आवश्यकता हो केंद्र उसे अनुदान उपलब्ध कराये।
  2. अनुच्छेद 275 विधिक अनुदान की बात करता है।
  3. विवेकाधीन अनुदान की चर्चा अनुच्छेद 282 के तहत की गई है।
  4. विधिक अनुदान, भारत की संचित निधि पर भारित होती है।



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अस्वीकरण – यहाँ प्रस्तुत अनुच्छेद और उसकी व्याख्या, मूल संविधान (उपलब्ध संस्करण), संविधान पर डी डी बसु की व्याख्या (मुख्य रूप से), प्रमुख पुस्तकें (एम. लक्ष्मीकान्त, सुभाष कश्यप, विद्युत चक्रवर्ती, प्रमोद अग्रवाल इत्यादि) एनसाइक्लोपीडिया, संबंधित मूल अधिनियम और संविधान के विभिन्न ज्ञाताओं (जिनके लेख समाचार पत्रों, पत्रिकाओं एवं इंटरनेट पर ऑडियो-विजुअल्स के रूप में उपलब्ध है) पर आधारित है। हमने बस इसे रोचक और आसानी से समझने योग्य बनाने का प्रयास किया है।