Article 273 of the Constitution | अनुच्छेद 273 व्याख्या

यह लेख Article 273 (अनुच्छेद 273) का यथारूप संकलन है। आप इस मूल अनुच्छेद का हिन्दी और इंग्लिश दोनों संस्करण पढ़ सकते हैं। आप इसे अच्छी तरह से समझ सके इसीलिए इसकी व्याख्या भी नीचे दी गई है आप उसे जरूर पढ़ें, और MCQs भी सॉल्व करें।

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📜 अनुच्छेद 273 (Article 273) – Original

भाग 12 [वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद] अध्याय 1 – वित्त (संघ और राज्यों के बीच राजस्वों का वितरण)
273. जूट पर और जूट उत्पादों पर निर्यात शुल्क के स्थान पर अनुदान— (1) जूट पर और जूट उत्पादों पर निर्यात शुल्क के प्रत्येक वर्ष के शुद्ध आगम का कोई भाग असम, बिहार, 1[ओडिशा] और पश्चिमी बंगाल राज्यों को सौंप दिए जाने के स्थान पर उन राज्यों के राजस्व में सहायता अनुदान के रूप में प्रत्येक वर्ष भारत की संचित निधि पर ऐसी राशियां भारित की जाएंगी जो विहित की जाएं।

(2) जूट पर और जूट उत्पादों पर जब तक भारत सरकार कोई निर्यात शुल्क उदगृहित करती रहती है तब तक या इस संविधान के प्रारंभ से दस वर्ष की समाप्ति तक, इन दोनों में से जो भी पहले हो, इस प्रकार विहित राशियां भारत की संचित निधि पर भारित बनी रहेंगी।

(3) इस अनुच्छेद में, “विहित” पद का वही अर्थ है जो अनुच्छेद 270 में है।
===============
1. उड़ीसा (नाम परिवर्तन) अधिनियम, 2011 (2011 का 15) की धारा 5 द्वारा (1-11-2011 से) “उड़ीसा” कै स्थान पर प्रतिस्थापित।

अनुच्छेद 273 हिन्दी संस्करण

Part XII [FINANCE, PROPERTY, CONTRACTS AND SUITS] Chapter 1 – Finance (Distribution of revenues between the Union and the States)
273. Grants in lieu of export duty on jute and jute products. — (1) There shall be charged on the Consolidated Fund of India in each year as grants-in-aid of the revenues of the States of Assam, Bihar, 1[Odisha] and West Bengal, in lieu of assignment of any share of the net proceeds in each year of export duty on jute and jute products to those States, such sums as may be prescribed.

(2) The sums so prescribed shall continue to be charged on the Consolidated Fund of India so long as any export duty on jute or jute products continues to be levied by the Government of India or until the expiration of ten years from the commencement of this Constitution whichever is earlier.

(3) In this article, the expression “prescribed” has the same meaning as in article 270.
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1. Subs. by the Orissa (Alteration of Name) Act, 2011 (15 of 2011), s. 5, for “Orissa” (w.e.f. 1-11-2011).

Article 273 English Version

🔍 Article 273 Explanation in Hindi

भारतीय संविधान का भाग 12, अनुच्छेद 264 से लेकर अनुच्छेद 300क तक कुल 4अध्यायों (Chapters) में विस्तारित है (जिसे कि आप नीचे टेबल में देख सकते हैं)।

Chapters Title Articles
I वित्त (Finance) Article 264 – 291
II उधार लेना (Borrowing) Article 292 – 293
III संपत्ति संविदाएं, अधिकार, दायित्व, बाध्यताएं और वाद (PROPERTY, CONTRACTS, RIGHTS, LIABILITIES, OBLIGATIONS AND SUITS) 294 – 300
IV संपत्ति का अधिकार (Rights to Property) 300क
[Part 11 of the Constitution]

जैसा कि आप देख सकते हैं यह पूरा भाग संपत्ति संविदाएं, अधिकार, दायित्व, बाध्यताएं और वाद (PROPERTY, CONTRACTS, RIGHTS, LIABILITIES, OBLIGATIONS AND SUITS) के बारे में है।

संविधान का यही वह भाग है जिसके अंतर्गत हम निम्नलिखित चीज़ें पढ़ते हैं;

  • कर व्यवस्था (Taxation System)
  • विभिन्न प्रकार की निधियाँ (different types of funds)
  • संघ और राज्यों के बीच राजस्वों का वितरण (Distribution of revenues between the Union and the States)
  • भारत सरकार या राज्य सरकार द्वारा उधार लेने की व्यवस्था (Borrowing arrangement by Government of India or State Government)
  • संपत्ति का अधिकार (Rights to Property), इत्यादि।

संविधान के इस भाग (भाग 12) के पहले अध्याय को तीन उप-अध्यायों (Sub-chapters) में बांटा गया है। जिसे कि आप नीचे चार्ट में देख सकते हैं;

Sub-Chapters Title Articles
साधारण (General) Article 264 – 267
संघ और राज्यों के बीच राजस्वों का वितरण (Distribution of revenues between the Union and the States) Article 268 – 281
प्रकीर्ण वित्तीय उपबंध (Miscellaneous Financial Provisions) 282 – 291*
* अनुच्छेद 291 को 26वें संविधान संशोधन अधिनियम 1971 की मदद से निरसित (Repealed) कर दिया गया है।

इस लेख में हम अनुच्छेद 273 को समझने वाले हैं; जो कि संघ और राज्यों के बीच राजस्वों का वितरण (Distribution of revenues between the Union and the States) के तहत आता है। हालांकि मोटे तौर पर समझने के लिए आप नीचे दिये गए लेख से स्टार्ट कर सकते हैं;

केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध Center-State Financial Relations)
Closely Related to Article 273

| अनुच्छेद 273 – जूट पर और जूट उत्पादों पर निर्यात शुल्क के स्थान पर अनुदान (Grants in lieu of export duty on jute and jute products)

अनुच्छेद 273 के तहत जूट पर और जूट उत्पादों पर निर्यात शुल्क के स्थान पर अनुदान का वर्णन है। इस अनुच्छेद के तहत कुल तीन खंड आते हैं;

अनुच्छेद 273 के खंड (1) के तहत कहा गया है कि जूट पर और जूट उत्पादों पर निर्यात शुल्क के प्रत्येक वर्ष के शुद्ध आगम का कोई भाग असम, बिहार, ओडिशा और पश्चिमी बंगाल राज्यों को सौंप दिए जाने के स्थान पर उन राज्यों के राजस्व में सहायता अनुदान के रूप में प्रत्येक वर्ष भारत की संचित निधि पर ऐसी राशियां भारित की जाएंगी जो विहित की जाएं।

जैसा कि हम जानते हैं कि भारत के पूर्वी राज्य जैसे कि पश्चिम बंगाल, बिहार एवं असम जूट उत्पादन करने वाले भारत के अग्रणी राज्य है। इन्ही राज्यों के लिए इस अनुच्छेद के तहत कुछ अनुदान की व्यवस्था की गई है;

इस खंड के तहत कहा गया है कि जूट पर और जूट उत्पादों पर जो निर्यात शुल्क (Export Duty) लगता है उससे जो एक वर्ष में शुद्ध आय होता है उस रकम का कुछ हिस्सा असम, बिहार, ओडिसा और पश्चिम बंगाल को न देकर इन राज्यों के राजस्व में सहायता अनुदान के रूप में दिया जाएगा।

और ये जो रकम होगी यह भारत की संचित निधि से दी जाएगी। और उतनी रकम दी जाएगी जितनी रकम वित्त आयोग द्वारा सिफ़ारिश की जाएगी।

अनुच्छेद 273 के खंड (2) के तहत कहा गया है कि जूट पर और जूट उत्पादों पर जब तक भारत सरकार कोई निर्यात शुल्क उदगृहित करती रहती है तब तक या इस संविधान के प्रारंभ से दस वर्ष की समाप्ति तक, इन दोनों में से जो भी पहले हो, इस प्रकार विहित राशियां भारत की संचित निधि पर भारित बनी रहेंगी।

इस खंड के तहत कहा गया है कि जब तक भारत सरकार जूट पर और जूट उत्पादों पर निर्यात शुल्क लगाती रहेगी तब तक या फिर संविधान के प्रारम्भ से 10 वर्ष की समाप्ति तक (जो भी दोनों में से पहले हो) इस तरह से प्राप्त रकम भारत की संचित निधि का भाग बनी रहेगी।

अनुच्छेद 273 के खंड (3) के तहत कहा गया है इस अनुच्छेद में, “विहित (prescribed)” पद का वही अर्थ है जो अनुच्छेद 270 में है।

जैसा कि हमने ऊपर भी समझा कि कितनी रकम दी जाएगी ये वित्त आयोग तय करेगा जिसे कि अनुच्छेद 270 के खंड (3) में समझाया गया है।

तो यही है अनुच्छेद 273 , उम्मीद है आपको समझ में आया होगा। दूसरे अनुच्छेदों को समझने के लिए नीचे दिए गए लिंक का इस्तेमाल कर सकते हैं।

वित्त आयोग (Financial Commission) (Art 280)
Must Read

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Related MCQs with Explanation

Question 1: Article 273 of the Indian Constitution deals with:

(a) The power of the Union Government to levy taxes on goods and services
(b) The power of the State Governments to levy surcharges on the taxes levied by the Union Government
(c) The power of the Union Government to collect and distribute the Compensation Cess
(d) Grants in lieu of export duty on jute and jute products




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Answer: (d) Explanation: Article 273 of the Indian Constitution deals with Grants in lieu of export duty on jute and jute products. It provides for the payment of grants from the Union Government to the States of Assam, Bihar, Orissa, and West Bengal in lieu of their share of the net proceeds of the export duty on jute and jute products.


Question 2: The grants-in-aid provided under Article 273 of the Indian Constitution are:

(a) Charged on the Consolidated Fund of India
(b) Payable to the States of Assam, Bihar, Orissa, and West Bengal
(c) In lieu of their share of the net proceeds of the export duty on jute and jute products
(d) All of the above




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Answer: (d) Explanation: All of the above are true about the grants-in-aid provided under Article 273 of the Indian Constitution.


Question 3: The grants-in-aid provided under Article 273 of the Indian Constitution are payable until:

(a) The export duty on jute and jute products is re-imposed
(b) The Parliament of India decides to discontinue the grants
(c) The States of Assam, Bihar, Orissa, and West Bengal do not require them anymore
(d) None of the above




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Answer: (b) Explanation: The grants-in-aid provided under Article 273 of the Indian Constitution are payable until the Parliament of India decides to discontinue them.


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संसद की बेसिक्स
मौलिक अधिकार बेसिक्स
भारत की न्यायिक व्यवस्था
भारत की कार्यपालिका
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अस्वीकरण – यहाँ प्रस्तुत अनुच्छेद और उसकी व्याख्या, मूल संविधान (उपलब्ध संस्करण), संविधान पर डी डी बसु की व्याख्या (मुख्य रूप से), प्रमुख पुस्तकें (एम. लक्ष्मीकान्त, सुभाष कश्यप, विद्युत चक्रवर्ती, प्रमोद अग्रवाल इत्यादि) एनसाइक्लोपीडिया, संबंधित मूल अधिनियम और संविधान के विभिन्न ज्ञाताओं (जिनके लेख समाचार पत्रों, पत्रिकाओं एवं इंटरनेट पर ऑडियो-विजुअल्स के रूप में उपलब्ध है) पर आधारित है। हमने बस इसे रोचक और आसानी से समझने योग्य बनाने का प्रयास किया है।