Article 268 of the Constitution | अनुच्छेद 268 व्याख्या

यह लेख Article 268 (अनुच्छेद 268) का यथारूप संकलन है। आप इस मूल अनुच्छेद का हिन्दी और इंग्लिश दोनों संस्करण पढ़ सकते हैं। आप इसे अच्छी तरह से समझ सके इसीलिए इसकी व्याख्या भी नीचे दी गई है आप उसे जरूर पढ़ें, और MCQs भी सॉल्व करें।

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📜 अनुच्छेद 268 (Article 268) – Original

भाग 12 [वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद] अध्याय 1 – वित्त (संघ और राज्यों के बीच राजस्वों का वितरण)
268. संघ द्वारा उदगृहित किए जाने वाले किंतु राज्यों द्वारा संगृहीत और विनियोजित किए जाने वाले शुल्क (1) ऐसे स्टांप-शुल्क ***1 जो संघ सूची में वर्णित हैं, भारत सरकार द्वारा उदगृहित किए जाएंगे, किंतु

(क) उस दशा में, जिसमें ऐसे शुल्क 2[संघ राज्यक्षेत्र] के भीतर उदग्रहनीय हैं, भारत सरकार द्वारा, और
(ख) अन्य दशाओं में जिन-जिन राज्यों के भीतर ऐसे शुल्क उदग्रहणीय हैं, उन-उन राज्यों द्वारा,
संगृहीत किए जाएंगे।

(2) किसी राज्य के भीतर उद्‌ग्रहणीय किसी ऐसे शुल्क के किसी वित्तीय वर्ष में आगम, भारत की संचित निधि के भाग नहीं होंगे, किन्तु उस राज्य को सौंप दिए जाएंगे।

3[268क. [संघ द्वारा उदगृहित किए जाने वाला और संघ तथा राज्यों द्वारा संगृहीत और विनियोजित किया जाने वाला सेवा-कर] संविधान (एक सौँ एकवां संशोधन) अधिनियम, 2016 की धारा 7 द्वारा (16-9-2016 से) लोप किया गया।

===============
1. संविधान (एक सौ एकवां संशोधन) अधिनियम, 2016 की धारा 6 द्वारा (16-9-2016 से) “तथा औषधीय और प्रसाधन निर्मितियों पर ऐसे उत्पाद शुल्क” शब्दों का लोप किया गया।
2. संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 का धारा 29 और अनुसूची द्वारा “पहली अनुसूची के भाग ग॒ में विनिर्दिष्ट राज्य” के स्थान पर (1-11-1956 से) प्रतिस्थापित।
3. संविधान (अठासीवां संशोधन) अधिनियम, 2003 की धारा 2 द्वारा अंतःस्थापित (प्रवृत्त नहीं हुआ है)।

अनुच्छेद 268 हिन्दी संस्करण

Part XII [FINANCE, PROPERTY, CONTRACTS AND SUITS] Chapter 1 – Finance (Distribution of revenues between the Union and the States)
268. Duties levied by the Union but collected and appropriated by the States —(1) Such stamp duties 1*** as are mentioned in the Union List shall be levied by the Government of India but shall be collected—
(a) in the case where such duties are leviable within any 2[Union territory], by the Government of India, and
(b) in other cases, by the States within which such duties are respectively leviable.

(2) The proceeds in any financial year of any such duty leviable within any State shall not form part of the Consolidated Fund of India, but shall be assigned to that State.

3[268A. [Service tax levied by Union and collected and appropriated by the Union and the States.].—Omitted by the Constitution (One Hundred and First Amendment) Act, 2016, s. 7 (w.e.f. 16-9-2016).
==============
1. The words “and such duties of excise on medicinal and toilet preparations” omitted by the Constitution (One Hundred and First Amendment) Act, 2016, s. 6, (w.e.f. 16-9-2016).
2. Subs. by the Constitution (Seventh Amendment) Act, 1956, s. 29 and Sch., for “State Specified in Part C of the First Schedule” (w.e.f. 1-11-1956).
3. Ins. by the Constitution (Eighty-eighth Amendment) Act, 2003, s. 2 (not enforced).

Article 268 English Version

🔍 Article 268 Explanation in Hindi

भारतीय संविधान का भाग 12, अनुच्छेद 264 से लेकर अनुच्छेद 300क तक कुल 4अध्यायों (Chapters) में विस्तारित है (जिसे कि आप नीचे टेबल में देख सकते हैं)।

Chapters Title Articles
I वित्त (Finance) Article 264 – 291
II उधार लेना (Borrowing) Article 292 – 293
III संपत्ति संविदाएं, अधिकार, दायित्व, बाध्यताएं और वाद (PROPERTY, CONTRACTS, RIGHTS, LIABILITIES, OBLIGATIONS AND SUITS) 294 – 300
IV संपत्ति का अधिकार (Rights to Property) 300क
[Part 11 of the Constitution]

जैसा कि आप देख सकते हैं यह पूरा भाग संपत्ति संविदाएं, अधिकार, दायित्व, बाध्यताएं और वाद (PROPERTY, CONTRACTS, RIGHTS, LIABILITIES, OBLIGATIONS AND SUITS) के बारे में है।

संविधान का यही वह भाग है जिसके अंतर्गत हम निम्नलिखित चीज़ें पढ़ते हैं;

  • कर व्यवस्था (Taxation System)
  • विभिन्न प्रकार की निधियाँ (different types of funds)
  • संघ और राज्यों के बीच राजस्वों का वितरण (Distribution of revenues between the Union and the States)
  • भारत सरकार या राज्य सरकार द्वारा उधार लेने की व्यवस्था (Borrowing arrangement by Government of India or State Government)
  • संपत्ति का अधिकार (Rights to Property), इत्यादि।

संविधान के इस भाग (भाग 12) के पहले अध्याय को तीन उप-अध्यायों (Sub-chapters) में बांटा गया है। जिसे कि आप नीचे चार्ट में देख सकते हैं;

Sub-Chapters Title Articles
साधारण (General) Article 264 – 267
संघ और राज्यों के बीच राजस्वों का वितरण (Distribution of revenues between the Union and the States) Article 268 – 281
प्रकीर्ण वित्तीय उपबंध (Miscellaneous Financial Provisions) 282 – 291*
* अनुच्छेद 291 को 26वें संविधान संशोधन अधिनियम 1971 की मदद से निरसित (Repealed) कर दिया गया है।

इस लेख में हम अनुच्छेद 268 को समझने वाले हैं; जो कि संघ और राज्यों के बीच राजस्वों का वितरण (Distribution of revenues between the Union and the States) के तहत आता है। हालांकि मोटे तौर पर समझने के लिए आप नीचे दिये गए लेख से स्टार्ट कर सकते हैं;

केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध Center-State Financial Relations)
Closely Related to Article 268

| अनुच्छेद 268 – संघ द्वारा उदगृहित किए जाने वाले किंतु राज्यों द्वारा संगृहीत और विनियोजित किए जाने वाले शुल्क (Duties levied by the Union but collected and appropriated by the States)

अनुच्छेद 268 के तहत आकस्मिकता निधि (Contingency Fund) का वर्णन है। इस अनुच्छेद के तहत कुल दो खंड आते हैं;

अनुच्छेद 268 के खंड (1) के तहत दो बातें कही गई है;

पहली बात) संघ सूची में उल्लिखित स्टांप शुल्क भारत सरकार द्वारा लगाए जाएंगे लेकिन अगर ऐसे शुल्क केंद्र शासित प्रदेश में लगाए जाएंगे तो उसे संगृहीत (Collect) भी भारत सरकार ही करेगा।

दूसरी बात) संघ सूची में उल्लिखित स्टांप शुल्क भारत सरकार द्वारा लगाए जाएंगे लेकिन अगर ऐसे शुल्क राज्यों में लगाए जाते हैं तो फिर उसे संगृहीत भी राज्य सरकार ही करेगा।

अनुच्छेद 268 के खंड (2) के तहत कहा गया है कि किसी राज्य के भीतर उद्‌ग्रहणीय किसी ऐसे शुल्क के किसी वित्तीय वर्ष में आगम, भारत की संचित निधि के भाग नहीं होंगे, किन्तु उस राज्य को सौंप दिए जाएंगे।

कहने का अर्थ है कि किसी भी वित्तीय वर्ष में किसी भी राज्य के भीतर लगाए जाने वाले ऐसे शुल्क की आय भारत की संचित निधि का हिस्सा नहीं बनेगी, बल्कि उस राज्य को सौंपी जाएगी।

कुल मिलाकर कहें तो केंद्र सरकार इसे शुरू (उद्गृहित /levied) तो करती है लेकिन इस अनुच्छेद के अंतर्गत आनेवाले कर (Tax) पूरी तरह से राज्य के खाते में जाता है। केंद्र का इस पर कोई अधिकार नहीं होता है। यानी कि केंद्र के संचित निधि में यह काउंट नहीं होता है।

अब सवाल ये आता है कि स्टांप शुल्क (Stamp duty) होता क्या है और संघ सूची में कौन सा Stamp Duties वर्णित है। आइये समझें;

स्टांप शुल्क (Stamp duty) क्या है?

भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के अनुसार, केंद्र सरकार लिखतों (instruments) के आदान-प्रदान पर स्टाम्प शुल्क लगाती है। इस लिखत (instrument) को किसी भी दस्तावेज़ के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके द्वारा कोई अधिकार या दायित्व बनाया जाता है, स्थानांतरित किया जाता है, सीमित किया जाता है, विस्तारित किया जाता है, या फिर समाप्त किया जाता है।

स्टाम्प ड्यूटी एक प्रकार का टैक्स है जो सरकार द्वारा विभिन्न कानूनी दस्तावेजों और लेनदेन पर लगाया जाता है। शुल्क का भुगतान भौतिक स्टांप खरीदकर और चिपकाकर या आधुनिक समय में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से किया जाता है, जिसमें यह दर्शाया जाता है कि आवश्यक शुल्क का भुगतान कर दिया गया है।

आसान भाषा में कहें तो स्टाम्प ड्यूटी एक टैक्स है जो संपत्ति के हस्तांतरण पर लगाया जाता है। स्टांप शुल्क आमतौर पर संपत्ति के खरीदार द्वारा भुगतान किया जाता है, लेकिन इसे खरीदार और विक्रेता के बीच भी साझा किया जा सकता है।

स्टांप शुल्क विभिन्न प्रकार के लेनदेन पर देना होता है, जैसे कि

◾ संपत्ति की बिक्री (Sale of property)
◾ संपत्ति की खरीद (Purchase of property)
◾ संपत्ति का उपहार (Gift of property)
◾ संपत्ति का बंधक (Mortgage of property)
◾ संपत्ति का पट्टा (Lease of property)
◾ शेयरों का स्थानांतरण (Transfer of shares)
◾ डिबेंचर का स्थानांतरण (Transfer of debentures)
◾ अन्य प्रतिभूतियों का स्थानांतरण (Transfer of other securities)

कितना स्टम्प शुल्क देना होगा यह हस्तांतरित की जा रही संपत्ति या संपत्ति के मूल्य पर निर्भर करती है। स्टांप शुल्क की दरें अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग होती हैं, लेकिन वे आम तौर पर संपत्ति या संपत्ति के मूल्य के 3% से 7% के बीच होती हैं।

स्टाम्प ड्यूटी राज्य सरकारों के लिए राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। स्टांप शुल्क का भुगतान करने के कई लाभ होते हैं;

◾ स्टांप शुल्क का भुगतान लेनदेन को कानून के तहत वैध और लागू करने योग्य बनाता है।
◾ स्टाम्प ड्यूटी का उपयोग अदालत में साक्ष्य के रूप में किया जा सकता है।
◾ स्टांप शुल्क का भुगतान करने से भविष्य में कानूनी विवादों से बचने में मदद मिल सकती है।

स्टांप शुल्क कैसे देय है (How is stamp duty payable?)?

गैर-न्यायिक (Non-Judicial) स्टाम्प पेपर का उपयोग आम तौर पर बिक्री विलेख, पट्टा विलेख आदि जैसे कानूनी दस्तावेजों के निष्पादन के लिए किया जाता है। कुछ मामलों में, चिपकने वाले टिकटों का उपयोग किया जाता है; उदाहरण के लिए, नोटरी अधिनियम, शेयर हस्तांतरण टिकटें।

उदाहरण के लिए जब आप मकान मालिक से Rent Agreement बनवाते हैं तो उसके लिए आमतौर पर 100 रुपए का स्टम्प लगता है जो कि प्रकृति में गैर-न्यायिक (Non-Judicial) होता है।

संघ सूची में कौन-कौन सा स्टम्प शुल्क वर्णित है (Which stamp duties are mentioned in the Union List?)?

जैसा कि हम जानते हैं कि अनुच्छेद 246 के तहत एक अनुसूची आती है जिसे हम 7वीं अनुसूची के नाम से जानते हैं। इस अनुसूची के तहत केंद्र-राज्य शक्तियों का बंटवारा के लिए तीन सूचियां बनाई गई है – संघ सूची (Union List), राज्य सूची (State List) एवं समवर्ती सूची (Concurrent List)

अनुच्छेद 268 का संबंध संघ सूची (Union List) से है। इस लिस्ट में स्टम्प शुल्क का वर्णन है। और जिन स्टम्प शुल्कों को राज्य संगृहीत करता है उसे The Indian Stamp Act, 1899 के तहत बताया गया है।

भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 एक राजकोषीय क़ानून है जो लेनदेन रिकॉर्ड करने वाले उपकरणों पर स्टाम्प के रूप में लगाए गए कर से संबंधित कानून बनाता है।

संघ सूची की प्रविष्टि 91 में निर्दिष्ट दस्तावेजों पर स्टांप शुल्क लगाया जाता है। इस एंट्री में निम्नलिखित विषय आते हैं;

विनिमयपत्र (bill of exchange), चेक (Cheque), वचनपत्र (Promise Notes), वहनपत्र (bills of lading), क्रेडिट पत्र (letters of credit), बीमा की पॉलिसियां (policies of insurance), शेयरों का हस्तांतरण (transfer of shares), डिबेंचर (debentures), प्रॉक्सी (proxy) और रसीदें (receipts)।

अनुच्छेद 268 के तहत, राज्य, जिसमें स्टांप शुल्क एकत्र किया जाता है, राज्य उस आय को अपने पास रखता है। हालांकि अगर बात केंद्रशासित प्रदेश की हो तो आय भारत के समेकित निधि का हिस्सा बनती है। अभी की बात करें तो फिलहाल चेक को छोड़कर इन सभी दस्तावेजों पर ड्यूटी लगती है।

ये तो संघ सूची की बात हो गई जिसका जिक्र अनुच्छेद 268 में किया गया है। लेकिन इसके अलावे भी कई अन्य स्टम्प शुल्क है जिसे कि भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के तहत बताया गया है;

ऊपर उल्लिखित दस्तावेजों के अलावा अन्य दस्तावेजों पर स्टाम्प शुल्क संविधान की 7वीं अनुसूची के राज्य सूची में उल्लिखित विधायी प्रविष्टि 63 के आधार पर राज्यों द्वारा लगाया और एकत्र किया जाता है;

संघ सूची की प्रविष्टि 91 और राज्य सूची की प्रविष्टि 63 के दायरे में आने वाले स्टम्प शुल्क के अलावा भी अन्य प्रावधान है जो कि समवर्ती सूची प्रविष्टि 44 के तहत आता है और यह संघ और राज्यों दोनों की विधायी शक्ति के अंतर्गत आता हैं।

तीनों सूचियों का पीडीएफ़ यहाँ से डाउनलोड करें – In Hindi↗️– In English↗️

📌 अंत में यह याद रखिए कि अनुच्छेद 268A नामक एक अनुच्छेद भी संविधान में हुआ करता था जिसके तहत साल 2003 में सेवा कर (Service Tax) को लाया गया था लेकिन साल 2017 से GST लागू हो जाने के बाद सेवा कर को जीएसटी में भी मिला दिया गया इसीलिए अनुच्छेद 268A को साल 2016 में संविधान (एक सौँ एकवां संशोधन) अधिनियम द्वारा खत्म कर दिया गया है।

तो यही है Article 268 , उम्मीद है आपको समझ में आया होगा। दूसरे अनुच्छेदों को समझने के लिए नीचे दिए गए लिंक का इस्तेमाल कर सकते हैं।

केंद्र-राज्य विधायी संबंध (Center-state legislative relation)
Must Read

सवाल-जवाब के लिए टेलीग्राम जॉइन करें; टेलीग्राम पर जाकर सर्च करे – @upscandpcsofficial

Article 268 Related MCQs with Explanation

Question 1: Which of the following statements about Article 268 of the Indian Constitution is CORRECT?

(a) It deals with the distribution of revenue between the Union and the States.
(b) It provides for the imposition of duties by the Union on goods imported into India.
(c) It empowers the Union to levy taxes on agricultural income.
(d) It provides for the imposition and appropriation of duties by the Union, but collected and appropriated by the States.




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Answer: (d), Explanation: Article 268 of the Indian Constitution provides for the imposition and appropriation of duties by the Union, but collected and appropriated by the States. This means that the Union Government has the power to levy certain taxes, but the revenue from these taxes is collected and appropriated by the State Governments.


Question 2: Which of the following is the MAIN purpose of Article 268 of the Indian Constitution?

(a) To ensure that the Union Government has a sufficient source of revenue.
(b) To provide the State Governments with a source of revenue.
(c) To promote cooperation and coordination between the Union Government and the State Governments.
(d) All of the above.




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Answer: (c) Explanation: The main purpose of Article 268 of the Indian Constitution is to promote cooperation and coordination between the Union Government and the State Governments by empowering the Union Government to levy certain taxes, but allowing the State Governments to collect and appropriate the revenue from these taxes.


Question 3: Which of the following is a LIMITATION on the power of the Union Government under Article 268 of the Indian Constitution?

(a) The Union Government can only levy duties that are listed in the Union List of the Seventh Schedule of the Constitution.
(b) The Union Government cannot levy duties that are discriminatory or protective in nature.
(c) The Union Government must consult with the State Governments before levying any new duties under Article 268.
(d) All of the above.




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Answer: (d), Explanation: All of the above are limitations on the power of the Union Government under Article 268 of the Indian Constitution.


Question 4: Which of the following is the most IMPORTANT implication of Article 268 of the Indian Constitution?

(a) It helps to maintain the balance of power between the Union Government and the State Governments.
(b) It ensures that the State Governments have a sufficient source of revenue to meet their needs.
(c) It promotes cooperation and coordination between the Union Government and the State Governments.
(d) All of the above.




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Answer: (d), Explanation: All of the above are important implications of Article 268 of the Indian Constitution.



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अनुच्छेद 269 – भारतीय संविधान
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मौलिक अधिकार बेसिक्स
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अस्वीकरण – यहाँ प्रस्तुत अनुच्छेद और उसकी व्याख्या, मूल संविधान (उपलब्ध संस्करण), संविधान पर डी डी बसु की व्याख्या (मुख्य रूप से), प्रमुख पुस्तकें (एम. लक्ष्मीकान्त, सुभाष कश्यप, विद्युत चक्रवर्ती, प्रमोद अग्रवाल इत्यादि) एनसाइक्लोपीडिया, संबंधित मूल अधिनियम और संविधान के विभिन्न ज्ञाताओं (जिनके लेख समाचार पत्रों, पत्रिकाओं एवं इंटरनेट पर ऑडियो-विजुअल्स के रूप में उपलब्ध है) पर आधारित है। हमने बस इसे रोचक और आसानी से समझने योग्य बनाने का प्रयास किया है।